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Sunday, July 7, 2013

जेल में कैदियों को बताया कर्मो का महत्व

जेल में कैदियों को बताया कर्मो का महत्व
जासंकें, गुड़गांव : कर्मो के आधार पर ही संसार चलता है। कर्मों से ही मनुष्य महान या कंगाल बनता है यह बातें प्रजापिता ब्रंााकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय, माउंट आबू, राजस्थान से पहुंचे योगी ब्रंााकुमार भगवान ने कही। वे जिला जेल में बंद कैदियों को संस्कार परिवर्तन, कर्मो की गुहय गति व व्यवहार शुद्धि विषय पर संबोधित कर रहे थे। उन्होने कहा कि ये कारागृह कैदियों के लिए परिवर्तन की तपोस्थली है जिसमें एकांत में बैठकर स्वंय के बारे में टटोलना है कि मैं संसार में क्यों आया हूं, मेरे जीवन का उद्देश्य क्या है। भगवान ने मुझे किस उद्देश्य से संसार में भेजा है ऐसा चिंतन कर अपने व्यवहार और संस्कारों का परिवर्तन करना है। भगवान भाई ने कहा कि कर्म ही मनुष्य को वाल्या डाकू से रामायण लिखने वाला वाल्मिकी जैसे महान व्यक्ति बना सकते हैं। मनुष्य जीवन बडा अनमोल है उसे व्यर्थ कर्म कर व्यर्थ नहीं गंवाना है। उन्होंने बताया कि वास्तव में मनुष्य जन्म से अपराधी नहीं होता गलत संगत,गलत खान-पान, व्यसन, लोभ, लालच, काम,क्र ोध आदि बुराईयों के कारण वह अपराधी बन जाता है। उन्होने बताया कि जीवन में अपराध होने पर मनुष्य को कारागृह में लाया जाता है इसलिए यह कारागृह नहीं बल्कि सुधारगृह है। भगवान भाई ने कहा कि जीवन की समस्या कुछ पिछले जन्मों के गलत कर्मों के कारण भी आती है इसलिए कर्मो को श्रेष्ठ बनाने का प्रयास करें। बदला लेने से समस्याएं बढ़ जाती है। बदला लेने के बजाए स्वंय को बदलना चाहिए। बीके सुरेंद्र शर्मा ने बताया कि गलतियां होने का कारण स्वयं की वास्तविकता को आज भूल गये हैं और अपने पिता परमात्मा को भी भूल गये हैं। जिसके कारण वर्तमान समय जो भाई-भाई का आपस में प्यार होना चाहिए वह नहीं है इसके लिए मनुष्य को आज आध्यात्मिकता की आवश्यकता है। आध्यात्मिकता से ही आपसी भाई चारे का नाता जुड़ सकता है, जीवन में नैतिकता आ सकती है और हम अपराध मुक्त बन सकते हैं। जिला जेल उपअधिक्षक रमेश कुमार ने कहा कि ब्रंााकुमारीज संस्था के दारा किये जा रहे कार्य की सराहना करते हुए कहा कि इन ज्ञान की बातों को अपने जीवन में लाकर अपना जीवन श्रेष्ठ बनायें। इस मौके पर बीके विक्रम, बीके संजय और एडवोकेट राजरिशी भी शामिल थे।

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