Pages

Wednesday, February 12, 2020

बचपन से ही भरें श्रेष्ठ संस्कार और सुविचार – भगवान भाई

बचपन से ही भरें श्रेष्ठ संस्कार और सुविचार – भगवान भाई

sirsa 11 feb photo 07
सतीश बंसल
सिरसा- वर्तमान समय में बच्चों को नैतिक मूल्यों व श्रेष्ठ संस्कारों की ओर प्रेरित करना अत्यन्त आवश्यक है। बच्चे ही भारत की तस्वीर बदल सकते हैं, इसके लिए उन्हें नैतिक शिक्षा द्वारा चरित्रवान बनाने की जरूरत है। उक्त उद्गार प्रजापिता ब्रह्माकुमारीज ईश्वरीय विश्वविद्यालय माऊंट आबू (राजस्थान) से आए हुए राजयोगी ब्रह्माकुमार भगवान भाई ने स्थानीय डी.जे. पब्लिक स्कूल में छात्र-छात्राओं को नैतिक शिक्षा के महत्व पर बोलते हुए कहे। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में भारत में युवाओं की संख्या सबसे अधिक है। आज के युवा ही कल का भावी समाज हंै, अगर हम भावी समाज को बेहतर बनाना चाहते हैं तो वर्तमान में युवाओं को चरित्रवान व गुणवान बनाने की आवश्यकता है
इस अवसर पर स्थानीय ब्रह्माकुमारीज राजयोग सेवा केन्द्र की ओर से बी.के. प्रीति बहन ने ब्रह्माकुमारीज ईश्वरीय विश्वविद्यालय में सिखाया जाने वाले ज्ञान के बारे में अवगत करवाया। कार्यक्रम के अंत में ब्रह्माकुमार भगवान भाई ने बच्चों का प्रसाद वितरित किया और सभी बच्चों से व्यसन व बुराईयों को त्यागने की प्रतिज्ञा करवाई। स्कूल की प्राचार्या सरोज रानी कम्बोज ने वर्तमान समय में नैतिक शिक्षा की आवश्यकता पर अपना व्याख्यान दिया। इस अवसर पर डायरेक्टर सुभाष जुनेजा व फूलवती जुनेजा भी विशेष रूप से उपस्थित थे। तदुपरान्त बी.के. पालाराम भाई ने सभी को ब्रह्माकुमारीज संस्था का परिचय दिया और बताया कि बी.के. भगवान भाई ने अबतक 5 हजार सेअ धिक स्कूलों में, 800 से अधिक काराग्रहों में नैतिक शिक्षा का पाठ पढ़ाया है, जिसके चलते उनका नाम इंडिया बुक ऑफ रिकार्ड में दर्ज है।

शिक्षक ला सकते हैं समाज व देश में रचनात्मक क्रांति– बी.के.भगवान

शिक्षक हैं भावी समाज के शिल्पी– बी.के. भगवान भाई
शिक्षक ला सकते हैं समाज व देश में रचनात्मक क्रांति– बी.के.भगवान
मोहाली: वर्तमान बिगड़ती परिस्थितियों को देखते हुए समाज को सुधरने की अति आवश्यकता है, आज के छात्रा ही भावी समाज के कर्णधर हंै, छात्रों को सुधरने के लिए आदर्श शिक्षकों की जरूरत है क्योंकि शिक्षक ही भावी समाज के शिल्पी हैं अतः समाज सुधर में शिक्षकों की अहम भूमिका है । ये विचार आज यहां फेज़ 6 के शिवालिक पब्लिक स्कूल में बी.एड. शिक्षकों व शिक्षिकाओं के जीवन में मूल्यों का महत्व व श्रेष्ठ समाज विषय पर आयोजित भव्य सेमीनार को संबोध्ति करते हुए माउंट आबू से पधरे ब्रह्माकुमार भगवान भाई ने मुख्य वक्ता के रूप में व्यक्त किये । बी.ेके.भगवान भाई इससे पूर्व समुचे भारत व नेपाल के 9000 स्कूल, कालेज, कल्बों के साथ साथ 900 से अध्कि जेलों में नैतिक शिक्षा पर प्रवचन कर चुके हैं जिससे उनका नाम इंडिया बुक आफ रिकार्ड में दर्ज है।
ब्रह्माकुमार भगवान भाई ने आगे कहा कि शिक्षक वही है जो अपने  जीवन की धरणाओं  से दूसरों को शिक्षा देता है । धरणओं से विद्यार्थियों में बल भरता है, धरणाओं से वाणी, कर्म, व्यवहार और व्यक्तित्व में निखार आता है । यदि शिक्षा देने के बाद भी बच्चे बिगड़ रहे हैं तो उसका मतलब है मूर्तिकार;शिक्षकद्ध में भी कुछ कमी है  । भगवान भाई ने कहा कि शिक्षक के संस्कारों का विद्यार्थी अनुसरण करते हैं । शिक्षक को केवल पाठ पढ़ाने वाला शिक्षक नहीं  बल्कि सारे समाज को श्रेष्ठ मार्गदर्शन देने वाला बनना है । शिक्षक में सद्गुण होने जरूरी हैं । शिक्षक के हाव-भाव, उठना, बैठना, बोलना चलना, व्यवहार करना का भी प्रभाव बच्चों पर पड़ता है  इसलिए समाज को श्क्षिित करने व शिक्षा देने के स्वरूप को बदलने की की भी जरूरत है । भगवान भाई ने कहा कि मूल्यहीन शिक्षा से सामाजिक, मानसिक, राष्ट्रीय, अंतराष्ट्रीय व परिवारिक समस्याएं पैदा होती हैं । उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी को नइ्र्र शिक्षा  देकर समाज व देश में रचनात्मक क्रांति लाने का कार्य शिक्षक का है ।शिक्षक को जीवन भर विद्यार्थी बनकर सीखना होगा।  उन्होने अंत में राजयोग का अभ्यास भी कराया ।
इस अवसर पर ब्रह्माकुमारी मीना बहन जी ने  कहा कि आध्यात्मिक ज्ञान मूल्यों का स्त्रोत है, बिना आध्यात्मिक के जीवन में नैतिक मूल्य नहीं आ सकते । इस उपलक्ष में  रोज अच्छा साहित्य  पढ़ें, अच्छा संग करें, नकारात्मक चीजों से दूर रहें व राजयोग का अभ्यास करें ।
एक अन्य कार्यक्रम  स्टार पब्लिक स्कूल सैक्टर 69 व जीनियस पब्लिक स्कूल  सैक्टर 69 में भी आयोजित किया गया जिसमें सकारात्मक जीवन शैली पर बच्चों व स्टाफ के साथ गहन विचार विमर्श हुए ।  इन स्कूलों में बी.के.भगवान भाई ने कहा कि  नैतिक शिक्षा से अपराध् मुक्त  समाज का निर्माण किया जा सकता है । उन्होंने कहा कि  कुसंग, व्यसन, सिनेमा और फैशन से आज की युवा पीढ़ी भटक रही है । शिक्षा एक बीज है और जीवन एक वृक्ष है जब तक इसे नम्रता, ध्ैर्यता, आपसी स्नेह, सत्यता, ईमानदारी आदि सद्गुण रूपी फल नहीं आते तब तक हमारी शिक्षा अध्री है । संस्कारित शिक्षा की कमी ही वर्तमान समय अपराधों का मूल कारण है । अतः उन्हंे नैतिक शिक्षा देने की जरूरत है । नैतिक शिक्षा की मुफत शिक्षा प्राप्ति के लिए उन्होंने ब्रह्माकुमारीज सुख शांति भवन फेज 7 में आने का सभी को निमंत्राण दिया ।

शिक्षक हैं भावी समाज के शिल्पी– बी.के. भगवान भाई

शिक्षक हैं भावी समाज के शिल्पी– बी.के. भगवान भाई
शिक्षक ला सकते हैं समाज व देश में रचनात्मक क्रांति– बी.के.भगवान
मोहाली: वर्तमान बिगड़ती परिस्थितियों को देखते हुए समाज को सुधरने की अति आवश्यकता है, आज के छात्रा ही भावी समाज के कर्णधर हंै, छात्रों को सुधरने के लिए आदर्श शिक्षकों की जरूरत है क्योंकि शिक्षक ही भावी समाज के शिल्पी हैं अतः समाज सुधर में शिक्षकों की अहम भूमिका है । ये विचार आज यहां फेज़ 6 के शिवालिक पब्लिक स्कूल में बी.एड. शिक्षकों व शिक्षिकाओं के जीवन में मूल्यों का महत्व व श्रेष्ठ समाज विषय पर आयोजित भव्य सेमीनार को संबोध्ति करते हुए माउंट आबू से पधरे ब्रह्माकुमार भगवान भाई ने मुख्य वक्ता के रूप में व्यक्त किये । बी.ेके.भगवान भाई इससे पूर्व समुचे भारत व नेपाल के 9000 स्कूल, कालेज, कल्बों के साथ साथ 900 से अध्कि जेलों में नैतिक शिक्षा पर प्रवचन कर चुके हैं जिससे उनका नाम इंडिया बुक आफ रिकार्ड में दर्ज है।
ब्रह्माकुमार भगवान भाई ने आगे कहा कि शिक्षक वही है जो अपने  जीवन की धरणाओं  से दूसरों को शिक्षा देता है । धरणओं से विद्यार्थियों में बल भरता है, धरणाओं से वाणी, कर्म, व्यवहार और व्यक्तित्व में निखार आता है । यदि शिक्षा देने के बाद भी बच्चे बिगड़ रहे हैं तो उसका मतलब है मूर्तिकार;शिक्षकद्ध में भी कुछ कमी है  । भगवान भाई ने कहा कि शिक्षक के संस्कारों का विद्यार्थी अनुसरण करते हैं । शिक्षक को केवल पाठ पढ़ाने वाला शिक्षक नहीं  बल्कि सारे समाज को श्रेष्ठ मार्गदर्शन देने वाला बनना है । शिक्षक में सद्गुण होने जरूरी हैं । शिक्षक के हाव-भाव, उठना, बैठना, बोलना चलना, व्यवहार करना का भी प्रभाव बच्चों पर पड़ता है  इसलिए समाज को श्क्षिित करने व शिक्षा देने के स्वरूप को बदलने की की भी जरूरत है । भगवान भाई ने कहा कि मूल्यहीन शिक्षा से सामाजिक, मानसिक, राष्ट्रीय, अंतराष्ट्रीय व परिवारिक समस्याएं पैदा होती हैं । उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी को नइ्र्र शिक्षा  देकर समाज व देश में रचनात्मक क्रांति लाने का कार्य शिक्षक का है ।शिक्षक को जीवन भर विद्यार्थी बनकर सीखना होगा।  उन्होने अंत में राजयोग का अभ्यास भी कराया ।
इस अवसर पर ब्रह्माकुमारी मीना बहन जी ने  कहा कि आध्यात्मिक ज्ञान मूल्यों का स्त्रोत है, बिना आध्यात्मिक के जीवन में नैतिक मूल्य नहीं आ सकते । इस उपलक्ष में  रोज अच्छा साहित्य  पढ़ें, अच्छा संग करें, नकारात्मक चीजों से दूर रहें व राजयोग का अभ्यास करें ।
एक अन्य कार्यक्रम  स्टार पब्लिक स्कूल सैक्टर 69 व जीनियस पब्लिक स्कूल  सैक्टर 69 में भी आयोजित किया गया जिसमें सकारात्मक जीवन शैली पर बच्चों व स्टाफ के साथ गहन विचार विमर्श हुए ।  इन स्कूलों में बी.के.भगवान भाई ने कहा कि  नैतिक शिक्षा से अपराध् मुक्त  समाज का निर्माण किया जा सकता है । उन्होंने कहा कि  कुसंग, व्यसन, सिनेमा और फैशन से आज की युवा पीढ़ी भटक रही है । शिक्षा एक बीज है और जीवन एक वृक्ष है जब तक इसे नम्रता, ध्ैर्यता, आपसी स्नेह, सत्यता, ईमानदारी आदि सद्गुण रूपी फल नहीं आते तब तक हमारी शिक्षा अध्री है । संस्कारित शिक्षा की कमी ही वर्तमान समय अपराधों का मूल कारण है । अतः उन्हंे नैतिक शिक्षा देने की जरूरत है । नैतिक शिक्षा की मुफत शिक्षा प्राप्ति के लिए उन्होंने ब्रह्माकुमारीज सुख शांति भवन फेज 7 में आने का सभी को निमंत्राण दिया ।

mportance of Moral Values in Making Noble Society

Mohali ( Punjab ): Brahma Kumaris of Mohali arranged Educational Programs for Teachers and the Students which was conducted by BK Bhagwan, from Mount Abu, Rajasthan. His subject to speak upon was “Importance of Moral Values in Making Noble Society“. BK Bhagwan has so far lectured in 9000 Schools, Colleges, Clubs, more than 900 Jails and various other Institutions in India and in Nepal. He is recognized by India Book of Records.
Addressing the B.Ed. teachers at Shivalic Public School he said, “Noticing the bad state of affairs, at present it is necessary to cure the society. Today’s students are future members of the society. So model teachers are required to correct the students because they are the Sculptures of Society in future. Therefore, teachers have the main role to play in social reformation”.
He said that the teacher must implement things in his own life before teaching to others. By practice students get their Power, Speech, Behavior, Action and Personality refined. If the children are getting spoilt, means the teacher is lacking something in himself. He said that the students generally follow their teachers. Not only teaching lessons but teacher must be able to guide and lead the society in proper direction. He must have good qualities. His expressions, behavior, speech, movements everything influences the children. That’s why to create a learned society, entire education system needs to be reformed.
He further said that by valueless education, social, mental, national and international problems creep up. It is the duty of Teachers to bring revolutionary Reformation in Society and Country by adopting a new method of educating the present Youth. Teacher himself must be a student throughout his life. Lastly, he conducted Rajayoga Meditation collectively with the audience.
On this occasion BK Meena said, “Spiritual Knowledge is the source of Values without which Moral Values cannot be there in life”. For this she advised, “Daily read good literature, keep good company, stay away from negative things and practice Rajayoga Meditation”.
At another program in Star Public School and Genius Public School both in Sector 69, BK Bhagwan discussed about Positive Lifestyle with the Staff and the Children. He said, “Through Value based Moral Education, Crime Free Society can be established. Today’s Youth has gone astray due to bad company, addictions, cinema and fashions”.
He said, “Education is a Seed, Life is a Tree. Until and unless the Tree bears the Fruits of Humility, Courage, mutual Friendship, Truth, Faithfulness etc. our Education remains incomplete. Lack of Culture in Education is the Root Cause of crimes at present”. He said that Moral Values Education therefore is the need of the hour. He extended the invitation to all to visit at Brahma Kumaris Centre, Sukh Shanti Bhawan in Phase 7, where Moral Values Education is imparted without any fees.