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Monday, February 13, 2023

शिवरात्रि का यथार्थ अर्थ और महत्व

 

शिवरात्रि का यथार्थ अर्थ और महत्व 

महाशिवरात्रि का आध्यात्मिक महत्व

महा अर्थार्थ ‘महान’, रात्रि अर्थार्थ ‘रात’ और जयन्ती अर्थार्थ ‘जन्म दिवस’. शिव आते हैं जब रात बहुत घनी होती है। परम-आत्मा का नाम है शिव, जिसका अर्थ है सदा ‘कल्याणकारी’ वो जो सभी का कल्याण करता है और हम उसके बच्चे हैं।

शिवरात्रि व शिवजयन्ती भारत में द्वापुरयुग से मनाई जाती है। यह दिन हम ईश्वर के इस धरा पर अवतरण के समय की याद में मनाते हैं।

शिव के साथ रात शब्द इसलिए जुड़ा है क्योकि वो अज्ञान की अँधेरी रत में आते हैं। जब सारा संसार अज्ञान रात्रि में होता है, जब सभी आत्माएं 5 विकारो के प्रभाव से पतित हो जाती हैं, जब पवित्रता और शान्ति का सत्य धर्म व स्वम् की आत्म पहचान भुला दी जाती है। सिर्फ ऐसे समय पर, हमे जगाने, समग्र मानवता के उत्थान व सम्पूर्ण विश्व में फिर से शान्ति का धर्म स्थापित करने परमात्मा आते हैं।

( भगवत गीता श्लोक :

यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भव- ति भारत ।

अभ्युत्थान- मधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्- ॥४-७॥

परित्राणाय- साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम्- ।

धर्मसंस्था- पनार्थाय सम्भवामि युगे युगे ॥४-८॥)

साथ ही महाशिवरात्रि के साथ जुड़े हुए आध्यात्मिक महत्व समझने का ये सबसे अच्छा अवसर है। शिव-लिंग परमात्मा शिव के ज्योति रूप को दर्शाता है। परमात्मा कोई मनुष्य नहीं है और न ही उसके पास कोई शारीरिक आकर है। भगवन शिव एक सूक्षम, पवित्र व स्व दीप्तिमान दिव्य ज्योति पुंज हैं। इस ज्योति को एक अंडाकार आकर से दर्शाया गया है। इसीलिए उन्हें ज्योर्ति-लिंग के रूप में दिखाया गया है “ज्योति का प्रतीक” . वो सत्य है, कल्याणकारी और सबसे खूबसूरत है तभी उसे सत्यम-शिवम्-सुंदरम कहा जाता है। वो सात-चित-आनंद सवरूप भी है।

शिव जयंती के 100 वर्ष बाद नए संसार की शुरुवात होती है। परम-पिता परम-आत्मा ही स्वर्ग रचते है। सम्पूर्ण विश्व और मानवता को परिवर्तन होने में 100 साल ला समय लगता हैं। यह सबस महान कार्य है। अगर हम सभी मुख्या पार्टधारी आत्माओं जैसे की अब्राहिम, बुद्ध, क्राइस्ट आदि का पार्ट दिखें तो ये निकल कर आता है की वे सभी परमात्मा के संदेश / पैगाम देने वाले संदेशी/पैगम्बर थे उनसभी ने अपना धरम स्थापित किया और परमात्मा के बारे में अपना-अपना दृष्टिकोण बताया और जीवन जीने की कला सिखाई। बहुत से महापुरषो ने इतिहास को बदला है।कईयों ने शांति के सन्देश से, कईयों ने, अपने ज्ञान और कईयों न जंगो से। परन्तु कुछ हद तक। धर्म सत्ता अभी भी है पर दुःख भी है क्योकि संसार पतन की और है। (आध्यात्मिक दृष्टिकोण से). कोई भी इस कितनी भी बड़ी कोशिशे हो पर, संसार का उत्थान कोई कर नहीं सकता।क्योकि यह कार्य कोई मनुष्य का नहीं है। जिसे सारे धर्म और संसार प्रार्थना करता है यह उसका काम है। बाकि सभी भगवन की और अलग अलग रस्ते बताते हैं। यह समझना होगा कि हम सभी मदद के लिए भगवान को प्रार्थना करते हैं, इसलिए यह बिलकुल है की हम सभी ने पहले भी कई बार उसकी मदद का अनुभव किया है। जबकि हम उससे ख़ुशी और शांति मांगते हैं तो इससे यह सिद्ध होता है कि वो इन सब का स्त्रोत व दाता है।तो प्रश्न यह है कि कब परम-आत्मा आते हैं और हमें अपना वर्सा देकर ये सब करते है? और इतना की इंसान आज भी उसे याद करता है, उसकी पूजा व प्रार्थना करता है? चलिए इन विडिओ के माध्यम से हम जानते हैं।

परमात्मा शिव त्रिमूर्ति हैं। वे ब्रह्मा द्वारा सवर्णिम युग की नव विश्व व्यवस्था करते हैं। वे उस विश्व की पलना विष्णु द्वारा करते हैं और शंकर द्वारा पुरानी कलयुगी सृष्टि जो कि अधर्म पूर्ण हो जाती है उसका विनाश कराते हैं। शिवरात्रि के प्रसंग में रात को अज्ञानता से दर्शया गया है। ज्ञान की रौशनी जहाँ लोप है। इसी अज्ञान के अंधियारे के कारन ही काम, क्रोध, लोभ, मोह, व अहंकार का सर्वव्याप्त अस्तित्व है। यह रात, अधर्म का चरम है। आज अशांति, अधर्म, साधारण व गलत कर्म करना ही हमारे की दिनचर्या का हिस्सा बन गया है, परन्तु यह कब तक चलेगा? कोन हमे सदा के लिए शांति व ख़ुशी प्रदान करेगा? इसीलिए यह आवश्यक हो जाता है कि जिस समय यह घोर अज्ञान की रात्रि जब इस धरा पर है तब स्वम् परमपिता शिव परमात्मा का इसी धरा पर आगमन हो और फिर से शांति और मूल्यों का संसार वो बनाएं।

आपको जानकर अत्यंत ख़ुशी होगी कि असल में वो तो पहले से ही इस धरा पर आया हुआ है एक साधारण सकरी माध्यम द्वारा फिरसे एक नए सुख, शांति व समृद्ध संसार को रचने। यह पवित्र महाशिवरात्रि का दिव्य सन्देश है। परमात्मा शिव को प्रेम से याद करके हम अपने सभी पापो से मुक्त हो सकते हैं। शिवरात्रि पर्व में साडी रात जागने का महत्व यही है की जो अभी का सारा संसार अज्ञान की घोर रात में है इसमे हमारा हमारे कर्मो पर पूर्ण ध्यान हो। आइये हम संकल्प करे कि हम पांच विकारो के प्रभाव से मुक्त रहेंगे और उनसे प्राप्त होने वाले कष्टों व भोगनाओं का हमारे अपने बुरे कर्मो द्वारा आहवाहन नहीं करेंगे। हमारे द्वारा अच्छी व पुण्य कर्म ही हों।

Wednesday, February 1, 2023

हम कौन है और क्या करते हैं?

 

हम कौन है और क्या करते हैं?

ब्रह्माकुमारीज़ क्या है?

ब्रह्माकुमारीज़ (BK) 1930 के दशक में भारत में ब्रह्मा बाबा के द्वारा स्थापित की गई संस्था है, जिसका आध्यात्मिक मुख्यालय इस समय भारत के राजस्थान माउण्ट आबू में है। भारत के बाहर ब्रह्माकुमारीज़ की सेवायें 1971 में शुरू हुई और इस समय विश्वभर में 110 देश और भूखण्डों में अपने सेवाकेन्द्रों के माध्यम से फैली हुई है। जिसके साथ लगभग 10 लाख विद्यार्थी जुड़े हुए हैं। विभिन्न संस्कृति और पृष्ठभूमि के लोगों को अपने आत्मा के निजी और श्रेष्ठ स्वभाव के अनुरूप जीना और बेहतर विश्व के निर्माण के लिए योगदान करने की प्रेरणा देते हुए ब्रह्माकुमारीज़ के द्वारा आध्यात्मिक ज्ञान और चिन्तनात्मक अभ्यास कराया जाता है।

ब्रह्माकुमारीज़ का लक्ष्य क्या है?

  • अपने जीवन को सर्वांगीण संदर्भ में देखते हुए खुद में व्यक्तिगत स्तर पर स्थान और उद्देश्य के प्रति गहरी समझ को विकसित करने की प्रेरणा देना।
  • अपने आध्यात्मिक अस्तित्व की पहचान को सुनिश्चित करना, मानव होने के नाते अपनी अन्तर्निहित अच्छाई, सभ्यता और महत्व को समझना।
  • मानव परिवार में अपनी स्मृति, दृष्टि, वृत्ति और कृति में परिवर्तन लाने हेतु प्रेरित करना।
  • सर्व अच्छाइयों के स्रोत के साथ अपने व्यक्तिगत सम्बन्ध को पुनर्जीवित करने हेतु व्यक्ति को मदद करना।
  • मानवमात्र में भाईचारे की भावना को बढ़ावा देने हेतु हरेक मनुष्य अपनी, धर्म, लिंग और राष्ट्रियता को भूलकर अपने अविनाशी मात-पिता, उस दिव्य सत्ता के साथ सम्बन्ध जोड़कर शक्ति लेना।
  • दिव्य सत्ता से प्राप्त शक्ति के आधार पर मानवमात्र के जीवन स्तर को बेहतर बनाने के लिए समाज में उन्हें पूरी तरह से जोड़ने हेतु सहयोगी कार्यक्रमों का आयोजन करना।
  • अहिंसा के सूत्र पर आधारित प्रकृति और मानवमात्र के बीच में सम्बन्ध को पुन: स्थापित करना।

ब्रह्माकुमारीज़ इन लक्ष्यों को कैसे पूरा करती है?

अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर अपने सेन्टर के माध्यम से ब्रह्माकुमारीज़ राजयोग मेडिटेशन कोर्स करने के लिए लोगों को आमंत्रित करती है, साथ-साथ अनेक प्रवचन, कार्यशालायें, छोटे कोर्सेज़ और कार्यक्रमों के माध्यम से व्यक्तिगत विकास में मदद करती है। स्थानीय स्तर पर लोगों की सेवा हेतु विभिन्न समाज कल्याण के कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है।

राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर ब्रह्माकुमारीज़ के प्रतिनिधि भागीदारी में किये गये कार्यों के माध्यम से विभिन्न प्रोजेक्ट के द्वारा लोगों को उन गतिविधियों में शामिल होकर अपने सामाजिक और मानवीय उत्तरदायित्य निभाने का अवसर प्रदान किया जाता है।

 

ब्रह्माकुमारीज़ के द्वारा स्थानीय समाज को क्या सहयोग मिलता है?

स्थानीय समाज तक पहुँचकर उन्हें सहयोग देने का कई बार ब्रह्माकुमारीज़ की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। मेडिटेशन सिखाने के लिए अनेक सम्मेलन, कोर्सेज़ और कार्यशालाओं का आयोजन किया जाता है। साथ-साथ व्यक्तिगत विकास और समाज में एक दूसरे के साथ मिलजुलकर रहते हुए काम करने के लिए प्रेरित किया जाता है। कोर्सेज़ और प्रस्तुतियाँ देश, संस्कृति और स्थानीय सुविधा के अनुसार होती हैं। अपने क्षेत्र में कोर्सेज़ के बारे में जानकारी के लिए

इन कोर्सेज़ को सामाजिक केन्द्र, कारागार, अस्पताल, वृद्धाश्रम, नशामुक्ति केन्द्र, स्कूल और स्थानीय व्यवसाइयों आदि के बीच कराया जाता है। अपने जीवन में स्वास्थ्य और जीवन के स्तर को श्रेष्ठ बनाने हेतु यह कोर्सेज़ व्यावहारिक और प्रयोगात्मक आध्यात्मिक ज्ञान पर आधारित होते हैं। ब्रह्माकुमारीज़ की शिक्षाओं में से इसकी सामग्री को लिया जाता है। व्यक्ति अपने आत्मानुभूति के साथ आध्यात्मिकता को अपने जीवनकौशल के साथ प्रयोग में लाते हुए जीवन की सम्पूर्णता को अनुभव करता है जिससे सम्बन्धों में भी सरलता आती जाती है।

राजयोग ध्यान के साथ-साथ अन्य कोर्सेज़ जो लोगों को दिये जाते हैं उसमें शामिल हैं:

  • क्रोध पर विजय: क्रोध अथवा गुस्से के विभिन्न सूक्ष्म रूप और उनके कारणों को समझना। स्वास्थ्य पर होने वाले उसके प्रभाव को जानना और अपनी ऊर्जा को किस तरह से उत्पादक रीति से इस्तेमाल करे, इसकी समझ विकसित करना।
  • सकरात्मक चिन्तन: अपने दृष्टिकोण, सार्थकता, सत्यता और प्रामाणिकता के साथ स्वतन्त्रता और स्व नियन्त्रण में विचारों की भूमिका को समझते हुए अपने जीवन को सही आकार देना। 
  • आत्म सम्मान: अपने आत्म सम्मान और स्वयं की योग्यता को बढ़ाने हेतु आन्तरिक व्यक्तिगत विशेषताओं का पुर्ननिर्माण करना। 
  • तनावमुक्त जीवन: बदलता हुआ तनाव का स्तर, चिन्ता और परेशानियों को पहचानना, समझना और अपने जीवनशैली में कुछ छोटे-छोटे परिवर्तन लाकर आसान तरीकों से उन्हें व्यवस्थित करना।

इसके अलावा सहयोग के लिए अन्य सेवायें जो उपलब्ध हैं।

  • पुरुष और महिलाओं के लिए सशक्तिकरण
  • पर्यावरण
  • नेतृत्व
  • युवा

गतिविधियों के अन्य क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य सुधार, सर्वधर्म समभाव, और कारागार कार्यक्रम किये जाते हैं। कई स्थानों पर आवासीय रिट्रीट सेन्टर्स बने हुए हैं जिनके द्वारा सहयोगात्मक और पोषणात्मक वातावरण उपलब्ध कराया जाता है जिसमें व्यक्ति और व्यवसायी ग्रुप आध्यात्मिकता और राजयोग के अभ्यास को समझकर अपने व्यक्तिगत और पारिवारिक और कार्यक्षेत्र पर उसका इस्तेमाल कर सकते हैं। 

वैश्विक पहल एवं भागीदारी

ब्रह्माकुमारीज़ किस तरह से वैश्विक रूप से अपनी भागीदारी एवं पहल करती है

ब्रह्माकुमारीज़ कई तरह से भागीदारी में कार्य करती है, जिसमें उद्देश्य और सिद्धान्त एक जैसे होते हैं। भागीदारी में समाविष्ट है।

  • `इण्डिया वन' सोलार थर्मल पावर प्लान्ट : यह एक अनुसंधान एवं विकास के साथ नवीकरणीय ऊर्जा तकनीकी में आध्यात्मिकता और मूल्यों का मिला जुला प्रयास है।
  • यौगिक खेती : इस प्रोजेक्ट को भारत के गुजरात राज्य से संचालित किया जा रहा है। जिसके माध्यम से किसानों को खेती में काम करते समय अपने मन की स्थिति को शान्ति और प्रेम से भरपूर रखने की शिक्षा दी जाती है जिसके असाधारण परिणाम देखने को मिले हैं। गुजरात की एसडी एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी के द्वारा किये गये प्राथमिक अनुसंधान के माध्यम से दिये गये सुझाव के आधार पर यह सुनिश्चित हुआ कि फसल की उपज और मिनरल कन्टेन्ट को निश्चित प्रतिशत तक बढ़ाया जा सकता है। ब्रह्माकुमारीज़ के ग्राम विकास प्रभाग द्वारा इसके अनुसंधान के लिए किसान या प्रकृति को किसी भी प्रकार के खर्च की आवश्यकता नहीं है। अन्य उल्लेखनीय फायदों में देखा गया है कि किसानों के स्वास्थ्य में सुधार के साथ-साथ भावनात्मक क्षमता का विकास भी होता है। अधिक जानकारी के लिए
  • आशा की पुकार और प्रतीक : विश्व को लाभ पहुंचाने वाला मीडिया एक प्रतिनिधि है। मिशन : हम जिस प्रकार के विश्व में रहना चाहते हैं उसमें ना केवल समस्या समाधान अपितु सकारात्मक परिवर्तन पर भी ध्यान केन्द्रित किया जाये। यह कोई कटु सत्य का सामना करना नहीं है परन्तु यह मानव की अच्छाईयों को बढ़ावा देना है, जब सम्भव हो। जिस तरह के भविष्य को हम चाहते हैं उस तरफ बढ़ने वाले कदमों पर प्रकाश डालना। अधिक जानकारी के लिए.
  • मानवता मंच की आत्माआधारभूत मानवीय मूल्यों की पुन: दिशा निश्चिति। विश्वभर की अनेक नई संस्थायें, समाज और व्यक्तियों का नेटवर्क मिलकर मूलभूत मानवीय मूल्यों के आधार पर निर्णय क्षमता और प्रशासन में परिवर्तन लाने की दिशा में सहायतार्थ प्रतिबद्ध है। यह मंच नेताओं को आपस में मिलजुलकर वार्तालाप और स्पष्टीकरणों के माध्यम से आगे बढ़ने के अपने तरीकों में नयापन लाने के लिए एक सुरक्षित स्थान प्रदान करता है। अधिक जानकारी के लिए  
  • ग्लोबल अस्पताल एवं अनुसंधान केन्द्र: सन 1989 में मुम्बई स्थित सिर और गले के सुप्रसिद्ध सर्जन डा. अशोक मेहता ने ब्रह्माकुमारीज़ के आध्यात्मिक मुख्यालय माउण्ट आबू का दौरा किया। उनके सकारात्मक अनुभव ने उन्हें यहाँ स्थित ब्रह्माकुमारीज़ के एक जैसे विचारों के लोगों के संगठन के साथ भागीदारी में कार्य करने की प्रेरणा दी, जिसके परिणाम स्वरूप सर्वांगीण स्वास्थ्य प्रदान करने वाला उनकी कल्पना का एक आदर्श अस्पताल का निर्माण हुआ। इस प्रोजेक्ट को मुम्बई और हवाई यू.एस.ए में रहने वाले खुबा और गुलाब वाटूमल ने गोद लिया। और इस तरह से उनके पिता की स्मृति में जे वाटूमल ग्लोबल अस्पताल और अनुसंधान केन्द्र की स्थापना हुई।
  • विश्व स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए जानकी फाउण्डेशन: यह यूके स्थित आध्यात्मिकता को स्वास्थ्य सुरक्षा क्षेत्र में प्रोत्साहन देने वाली धर्मार्थ शाखा है। यह स्वास्थ्य सेवा कर्मियों को मूल्याधारित वार्तालाप और प्रशिक्षणों के माध्यम से सहायता करती है और प्रेरणादायी किताबें, सीडीज़ और व्याख्यानों के माध्यम से उनके सामान्य स्वास्थ्य रक्षा में मदद करती है। इसके द्वारा ग्लोबल अस्पताल एवं अनुसंधान केन्द्र माउण्ट आबू, भारत को भी आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है, जो स्वास्थ्य सुरक्षा क्षेत्र में अत्याधुनिक चिकित्सा तकनीकि के साथ आध्यात्मिकता और सहायक औषधि प्रदान करने की पहल करने वाला अस्पताल साबित हो रहा है। जानकी फाउण्डेशन की अध्यक्ष है दादी जानकी।.
  • द प्वाइन्ट ऑफ लाइट फाउण्डेशन : विश्व समाज की सेवा हेतु यूएस में एक गैर व्यावसायिक संगठन की स्थापना की गई। स्वास्थ्य सुरक्षा क्षेत्र में आध्यात्मिकता की कल्पना को साकार करने के विचार से इस संगठन की स्थापना हुई। जिसका उद्देश्य ही है व्यक्ति का सर्वांगीण स्वास्थ्य। इस संगठन का लक्ष्य है स्वास्थ्य सेवा-क्षेत्र में विद्यमान मानकों के बीच व्यक्ति केन्द्रित दृष्टिकोण को शामिल करना और लोगों को सम्पूर्ण स्वास्थ्य रक्षा, स्वास्थ्य से जुड़ा हुआ आध्यात्मिक पहलू, सम्भाल, ठीक होना, खुद का ध्यान रखना और स्वास्थ्य रक्षा सम्बन्धी शिक्षा के बारे में जागृत करना। द प्वाइन्ट ऑफ लाइट फाउण्डेशन ब्रह्माकुमारीज़ के साथ दो मुख्य क्षेत्रों में भागीदारी के साथ काम करती है।
    • `स्वास्थ्य सुरक्षा में आशा' इस अवधारणा के अन्तर्गत स्वास्थ्य रक्षाकर्मी और स्थानीय लोगों को शिक्षा प्रदान करने में पहल करना।
    • जे वाटूमल ग्लोबल अस्पताल एवं अनुसंधान केन्द्र (माउण्ट आबू, भारत) के ग्रामीण विस्तार और इसके जैसे अन्य प्रोजेक्ट में अनुदान, व्यक्तिगत सहयोग, विशेषज्ञों का योगदान के रूप में सहायता करना।

ब्रह्माकुमारीज़ की वैश्विक पहल यह रचनात्मक तरीका उन लोगों के विचारों की उपज है जो अपने व्यक्तिगत जीवन में आध्यात्मिक उन्नति के साथ दुनिया में अपना कार्य भी करते रहते हैं। उनके सामूहिक ज्ञान और आन्तरिक गहरी समझ के आधार पर वृहद जनसंख्या में पहुंचकर सामयिक वैश्विक मुद्दों पर प्रकाश डालते हुए आध्यात्मिकता के साथ धर्मनिर्पेक्षता के दोहरे प्रभाव का इस्तेमाल करना। रोजमर्रा के जीवन में सहायक साबित होने वाले कोर्सेज़, गतिविधियाँ, कार्यक्रम और अन्य पहलुओं की रचना की जाती है। उनके द्वारा वृहद सांस्कृतिक संदर्भ और जिसमें शामिल है

  • द कॉल ऑफ द टाइम डायलॉग सिरीज (COTT):  ब्रह्माकुमारीज़ यूके की डायरेक्टर बीके जयन्ती कृपलानी और एमआईटी यूएसए के वरिष्ठ व्याख्याता पीटरसेन्ज और विभिन्न संस्कृतियों के, धर्मों और जातियों के वरिष्ठ नेताओं के सहयोग से संचालित इस संगठन का उद्देश्य है हरेक व्यक्ति के आन्तरिक निजी मूल्यों का सम्मान और सराहना करना। जहाँ पर वे व्यक्तिगत और सामूहिक विचारों के साथ अनेक महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श करते हैं। विश्व के सामने आने वाले समय जिस प्रकार की परिस्थितियाँ उत्पन्न होंगी उन पर इस तरह मिलजुलकर किया गया विचार-विमर्श काफी महत्वपूर्ण साबित हो सकता है, इस पर सभी सहमत हैं।
  • द फ्यूचर ऑफ पावर: यह एक ऐसे वार्तालाप की श्रृंखला है जिसमें भविष्य  में शक्ति का स्थानान्तरण और उसका 21वीं सदी में नेतृत्व पर होने वाला प्रभाव विषय पर प्रकाश डाला जाता है। दादी जानकी जी, ब्रह्माकुमारीज़ की मुख्य प्रशासिका और निज़ार जुमा नैरोबी स्थित व्यावसायिक और उद्योगपति के नेतृत्व में आयोजित किया गया यह चर्चा सत्र सफलतापूर्वक सहभागियों को अपने व्यस्त जीवन से समय निकालकर एकत्रित होकर इस बात का गहन अर्थ समझने का अवसर प्रदान करता है कि शक्ति का उनके जीवन में क्या अर्थ है
  • चूज, चेन्ज एण्ड बिकम रिट्रीट : विश्व के अनेक शहरों में इस तरह के वार्षिक सम्मेलन आयोजित किये जाते हैं। जिसमें एक जैसे विचारों के आशावादी युवाओं को एक साथ लाया जाता है और कार्य करने के नये और साहसी तरीके, सृजनात्मक और सकरात्मक जीवन जीने के तरीके इन विषयों पर चर्चा सत्रों के माध्यम से प्रकाश डाला जाता है। यहाँ पर परिवर्तन के प्रति नया नजरिया अपनाने को प्रयोगात्मक रूप से लेते हुए भीतर से बाहर की ओर बढ़ने का नजरिया, इस बात की गहरी समझ कि हमारे आन्तरिक जगत और बाहरी जगत का आपस में गहरा सम्बन्ध होता है जैसे विषयों पर चर्चा होती है। रिट्रीट के दौरान रचनात्मक तरीके से चिन्तन, वार्तालाप, सक्रिय सहभाग, ध्यान और खेल के माध्यम से युवाओं को अपनी क्षमता के अनुसार व्यकितगत जीवन का नक्शा बनाने के लिए प्रेरित किया जाता है।
  • नारी के चार रूप: महिलाओं को अपने जीवन के व्यक्तिगत, पारिवारिक और व्यावसायिक जीवन में सन्तुलन बनाये रखने में सहायता करना, अपने नारी होने के गहन अर्थ को जानना और उसकी विविधताओं को समझना तथा विश्व में मानवता की वास्तविक सत्यता और सद्भावना की पुनर्स्थापना में अपनी भूमिका के प्रति एहसास कराना।
  • मिलकर की हुई एक पहल के साथ:- बदलाव की वर्तमान गति को देखते हुए हमारे विश्व के अनेकानेक क्षेत्रों में अस्थिरता और लाखों लोगों की परेशानियाँ, शायद और कोई तरीका हो उन्हें मदद करने का। एक आध्यात्मिक व्यक्ति के रूप में हम सभी समान आध्यात्मिक प्रकाश और शक्ति को साझा करते हैं। अनेक लोग अब इस बात को महसूस कर रहे हैं कि हम अपनी चेतना को श्रेष्ठ बना सकते हैं और स्रोत के साथ जुड़कर उस एक की सेवा के निमित्त बन उस हीलिंग लाइट को उसके प्यार और शक्ति को विश्व में फैला सकते हैं।

यह एक आसान अभ्यास है जिसमें हम दूसरों को सक्षम और मजबूत बनाने की सेवा कर सकते हैं। इसी प्रक्रिया में दैनिक जीवन की चुनौतियों का सामना करने के लिए हम अपनी क्षमता को भी बढ़ाते हैं। वह एक, जिसे हम किसी भी नाम से पुकारे, जिसके साथ हम अपनी हर बात साझा करते हैं, जिसके साथ हम जुड़े हुए हैं, हम आपको आमंत्रित करते हैं, आईये हर साल हमारे साथ जुड़िये एक सामूहिक प्रयास उस एक के साथ जुड़ने का, 21 सितम्बर से। जिसे युनाइटेड नेशन ने शान्ति दिवस के रूप में घोषित किया है। 2 अक्टूबर जो युनाइटेड नेशन्स के द्वारा अहिंसा दिवस के रूप में मनाया जाता है। 

  •  केवल एक मिनट (just-a-minute) ब्रह्माकुमारीज़ की 70वीं वर्षगाठ को मनाने हेतु की गई यह एक पहल थी। विश्व भर के अनेकानेक लोग सारे दिन में छोटे-छोटे योगाभ्यास अन्तराल के फायदों को महसूस करने लगे हैं। हमारे आस-पास चाहे जो कुछ भी हो रहा हो यह छोटे-छोटे योगाभ्यास अन्तराल हमारे व्यस्त और अधिकतर चुनौती भरे दिन के बीच हमें शान्ति और स्वास्थ्य का अनुभव कराने में मदद रूप साबित होते हैं। इन एक मिनट के अन्तराल को हरेक अभ्यास में ला सकता है। कभी भी, कहीं भी। जस्ट ए मिनट के वेबसाइट इसके लिए आसान साधन और उपयोग में लाई गई युक्तियाँ आपको बतायेगी।
  • शान्ति और अहिंसा की संस्कृति:  शान्ति और अहिंसा की संस्कृति यह शान्ति स्थापना के प्रति एक प्रतिबद्धता है जिसमें योग, समस्या समाधान और रोकथाम, शान्ति की शिक्षा, अहिंसा की शिक्षा, सहनशीलता, स्वीकार करना, आपसी सम्मान, अन्तर्जातीय और अन्तर्संस्कृति चर्चा सत्र और सुलह शामिल हैं। 2000 से 2010 तक ब्रह्माकुमारीज़ ने यूएन द्वारा घोषित मैनीफेस्टो प्रपत्र पर लाखों हस्ताक्षर करवाने में सहयोग किया था।
  • बेहतर ‍िवश्व ‍िनर्माण के लिए मूल्यों का सहयोग: सितम्बर 1994 में शुरु हुआ यह एक वर्ष का प्रोजेक्ट था, जो अक्टूबर 1995 तक चलता रहा जिसका समापन यूएन50 के सम्मान समारोह में हुआ। साल भर सभी ब्रह्माकुमारीज़ सेन्टर्स ने 12 मूल्यों को ध्यान में रखते हुए इन कार्यक्रमों का आयोजन किया। जो मूल्य इस प्रकार थे। सहयोग, आजादी, खुशी, ईमानदारी, नम्रता, प्रेम, शान्ति, सम्मान, जिम्मेदारी, सरलता, सहनशीलता और एकता।
  • बेहतर विश्व निर्माण के लिए वैश्विक सहयोग (Global Co-operation for Better World) – "बेहतर विश्व की आपकी कल्पना क्या है?" इस प्रश्न को अनेक लोगों के सामने रखते हुए उनके विचार अथवा चित्र, उनकी प्रतिक्रियायें ब्रह्माकुमारीज़ ने युनाइटेड नेशन के पीस मैसेन्जर का कार्य करते हुए एकत्रित की। 120 से अधिक देशों के लोगों द्वारा भेजी गई अपनी कल्पनायें, आशायें, प्रेरणाओं को इकट्ठा किया गया। बेहतर विश्व की वैश्विक कल्पना का स्टेटमेन्ट लोगों द्वारा भेजी गई प्रतिक्रियाओं पर आधारित था। विज़न आफ ए बेटर वर्ल्ड जो कि एक मैसेन्जर पब्लिकेशन है, ने परियोजना से प्राप्त विचारों और रचनात्मकता को विशालता के साथ प्रकाशित किया था।
  • द मिलियन मिनट्स ऑफ पीस अपील शान्ति के लाखों क्षणों का आह्वान। यूएन के अन्तर्राष्ट्रीय शान्ति वर्ष को समर्पित इस कार्यक्रम में लोगों को अपने योग के कुछ पल और सकारात्मक चिन्तन शान्ति की प्रार्थनायें करने की अपील की गई। जो 88 देशों तक पहुंची और जिसके द्वारा शान्ति के 1231975713 क्षण इकट्ठे किये गये। जिन मिनटों को अगर मिलाया जाये तो 2344 वर्ष शान्ति बन जाते हैं। यूएन के सेक्रेट्री जनरल द्वारा ब्रह्माकुमारीज़ को इस वर्ष में उनके इस योगदान पर सात राष्ट्रीय और एक अन्तर्राष्ट्रीय शान्तिदूत सम्मान प्रदान किया गया।

शिक्षा और जीवन पद्धति

ब्रह्माकुमारीज़ का मुख्य पाठ्यक्रम क्या है?

राजयोग ध्यान कोर्स ब्रह्माकुमारीज़ पाठ्यक्रम के मूल में है । इस पाठ्यक्रम के द्वारा आत्मा और प्रकृति के बीच के सम्बन्ध की वास्तविक पहचान कराई जाती है। साथ-साथ आत्माओं का आपसी जुड़ाव, परमात्मा और भौतिक विश्व इसकी समझ को भी बढ़ाया जाता है।

कक्षाओं की इस श्रृंखला के द्वारा आपको कुशलतापूर्वक प्रभावशाली तरीके से अपनी भीतरी यात्रा कराई जाती है। इनके बारे में जानिये:

  • चेतना और आत्म अनूभूति
  • परमात्मा के साथ योग और सम्बन्ध
  • कर्म के सिद्धान्त
  • समय चक्र
  • जीवन एक वृक्ष
  • आध्यात्मिक जीवनशैली

एक पाठ को दो भागों में दिया जाता है।

  • भाग - 1: जिसमें राजयोग ध्यान का पूरा आधारभूत ज्ञान दिया जाता है। यह उनके लिए है जो योग कैसे करना और उसका नियमित अभ्यास करना इसमें रूचि रखते हैं।
  • भाग – 2 : जिसमें राजयोग के अभ्यास की शिक्षा दी जाती है। जो शिक्षा जिज्ञासु को वैश्विक सत्य की गहराई में ले जाती है। इस शिक्षा का उद्देश्य है मन को एकाग्र कैसे करना, और अपनी आत्मा की आन्तरिक दिव्यता की खोज सीखना। यह उन लोगों के लिए जो अपने कारणों और निर्णयों का अभ्यास करना चाहते हैं। जो अपने अनुभवों के स्वयं मालिक बनना चाहते हैं और अपनी जीवनशैली को आध्यात्मिक धरातल पर आगे बढ़ाना चाहते हैं।

ब्रह्माकुमारीज़ जीवनशैली के मुख्य स्तम्भ क्या हैं?

इसके मुख्य चार स्तम्भ है

  • अध्ययन – आध्यात्मिक ज्ञान के नियमित अध्ययन से आत्मा को सशक्त बनाया जाता है जिससे वह अपने जीवन के अंधविश्वासों से दूर हरेक घटना, स्थिति और परिस्थितियों को अवसर के रूप देखें और उनकी शिक्षाओं को लागू करें।
  • योग - मेडिटेशन के द्वारा स्रोत के साथ सीधा सम्बन्ध जोड़ा जा सकता है और आत्मा, परमात्मा से शक्ति लेकर अपने आपमें सक्षम होते हुए आध्यात्मिक क्षमता का निर्माण करती है। 
  • गुणों का अभ्यास – आत्मानुभूति के द्वारा आत्मा के निजी दिव्य गुणों का जागरण होता है जिससे स्वयं के प्रति नकारात्मक विश्वास पर विजय पाकर आत्मविश्वास की आजादी मिलती है। 
  • सेवा – स्वरूप में लाना ही सेवा का आधार है – कोई भी रोल निभाते समय आत्मा के निजी गुणों को अपने जीवन में लाना। 

ब्रह्माकुमारीज़ के जीवन क्रम में क्या कोई विशेष जीवनशैली के नियम है? 

आत्म अनुभूति के इस सफर में कुछ नियमों का पालन किया जाता है जिनका पालन करने के लिए बाध्य नहीं किया जाता परन्तु उनको धारण करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। ब्रह्माकुमारीज़ में इन नियमों का पालन करने का वातावरण बना हुआ है।

आध्यात्मिक ज्ञान का अध्ययन और उसका जीवन में अभ्यास यह हरेक की व्यक्तिगत आध्यात्मिक यात्रा से जुड़ा हुआ है। यह हरेक व्यक्ति की व्यक्तिगत जिम्मेदारी है कि वो ब्रह्माकुमारीज़ के द्वारा प्रोत्साहित किये जाने वाले कौन-से नियमों को अपने जीवन में कितना पालन कर सकता है और कहाँ तक वो नियम अनुकूल हैं।

जीवनशैली में नियमों के दो मुख्य प्रकार देखे गये हैं।

  • सात्विक (शुद्ध आहार): शाकाहारी अथवा वेगन आहार पद्धति साधारण स्वास्थ्य में सहयोगी साबित होते हैं, और स्पष्टता और एकाग्रता में मदद करते हैं। किसी भी प्रकार का नशा जिसमें शराब और तम्बाकू का भी समावेश है यह वर्जित है।
  • ब्रह्मचर्य –  लोगों को आपस में एक दूसरे के साथ सम्बन्ध और व्यक्तिगत जीवन में ब्रह्मचर्य सुरक्षित और पवित्र आधार है। ब्रह्मचर्य का चुनाव लोगों को सशक्त बनाने के साथ स्वतन्त्रता और आत्म-विश्वास से भरपूर करने वाला है। यह स्त्री-पुरुष दोनों को आत्म-निर्भर बनाकर समान दर्जा देने में सहायक होगा। ब्रह्माकुमारीज़ का नजरिया है आत्म-अनुभूति और परमात्मा के साथ गहरा सम्बन्ध इन दोनों का आधार ब्रह्मचर्य है। जिससे शान्ति और अंहिसा की सुसंस्कृति का निर्माण होगा।

ब्रह्माकुमारीज़ के परिवार का सदस्य बनने के लिए क्या हरेक को उनकी जीवनशैली को अपनाना होगा? 

नहीं, यह एक शैक्षणिक संगठन है जिसमें हरेक प्रतिभागी को आध्यात्मिक उन्नति की प्रक्रिया में शामिल किया जाता है। हरेक व्यक्ति पाठ्यक्रम में से अपनी रुचि अनुसार किन बातों को चुनना है उसके लिए स्वतंत्र है। यहाँ एक मुक्त शिक्षा का वातावरण होता है जिसमें विभिन्न पृष्ठभूमि के लोग आते हैं, अपने साथ अपनी विशेषताओं की श्रेष्ठता को लेकर आते हैं। उनकी प्रतिबद्धता का स्तर उनका अपना निर्णय होता है। 

क्या परिधान का कोई विशेष नियम है? 

कोई विशेष परिधान का नियम नहीं है लेकिन जब हम बीके कोर्सेज़ या क्लासेज़ में शामिल होते हैं तब नियमित एवं साधारण वेशभूषा यथोचित है। बीके परिवार में सफेद रंग को विशेष प्राथमिकता दी जाती हैं क्योंकि इस रंग से साधारण जीवनशैली के आंतरिक पहचान होती है साथ-साथ यह रंग पवित्रता, स्वच्छता और सत्यता को भी दर्शाता है। जिन गुणों को राजयोग अभ्यास में सहयोगी माना जाता है। 

ब्रह्माकुमारीज़ में धर्म को किस तरह से देखा जाता है? 

ब्रह्माकुमारीज के द्वारा धर्म को धारणा के साथ जोड़ा जाता है। परमात्मा द्वारा मानवमात्र को सिखाया गया यह एक वैश्विक सिद्धान्त है कि धारणा के द्वारा आध्यात्मिक पुनर्निर्माण और उत्थान हो। इस बात पर ब्रह्माकुमारीज़ के द्वारा जोर दिया जाता है। धर्म का उद्देश्य है इस बात को समझना कि आध्यात्मिकता मानवमात्र के प्रति न्याय, शान्ति और स्वास्थ्य प्रदान करने की कुंजी है।

हरेक आत्मा फिर वो चाहे किसी भी धर्म की हो उसका परमात्मा के साथ सम्बन्ध, विश्वास, जीवन के अनुभवों की समझ और अभ्यास के कारण आध्यात्मिकता के ढांचे में ढली हुई है। भविष्य में यही आध्यात्मिकता गहरे विश्वास के साथ लौटेगी। व्यावहारिक रूप से इसका अर्थ है कि आत्मा के भीतरी श्रेष्ठतम् गुण प्रेम, करुणा, सत्य और अंहिसा के साथ जीवन व्यतीत किया जाये।

`ज्ञान आधारित' योग कैसे कार्य करता है?

ब्रह्माकुमारीज़ की शिक्षायें इस आधार पर टिकी हुई हैं कि विश्व में अपने परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है जिसमें चेतना का भी परिवर्तन हो रहा है। अनेक शिक्षाओं में से एक मुख्य शिक्षा यह है कि मानवता के वृक्ष का बीज एक है – भगवान, परमपिता परमात्मा जो सदा सर्व दैवी गुणों से सम्पन्न रहता है। एक बीज की सन्तान होने के नाते सर्व मानव जाति एक परिवार है। अपने बाहरी भौतिक आधारों से निकल कर सूक्ष्म रीति से भीतरी आध्यात्मिक अनुभव के साथ जुड़ना मनुष्य जाति को अपने स्रोत परमात्मा के साथ जुड़ने का अहसास कराता है और अपने निजी संस्कार शान्ति, सम्मान और स्नेह की पुनर्जागृति करता है।

राजयोग अभ्यास के लिए हरेक व्यक्ति को आध्यात्मिक ज्ञान का अध्ययन करना आवश्यक है। ज्ञान की समझ उसके प्रत्यक्ष जीवन में अभ्यास और धारणा के लिए अति आवश्यक है। राजयोग का लक्ष्य ही है आत्म सम्मान और शक्ति को हांसिल करना, इसलिए हरेक को अपने आध्यात्मिक यात्रा में इस समझ के साथ आगे बढ़ने की आवश्यकता है। अध्ययन की प्रक्रिया बहुत सहज है: शिक्षाओं को ध्यान से सुनना और समझना; उस पर चिन्तन करना और उसके अर्थ को अपने जीवन में किस तरह से धारण करना है यह समझना; ज्ञान को धारण करना और अपने आत्मा के निजी संस्कारों को इमर्ज करना;  व्यावाहारिक ज्ञान के अर्थ को समझकर हरेक कर्म के साथ जुड़े हुए गुण को प्रैक्टिकल में अमल में लाना।

राजयोग प्रशिक्षक की भूमिका क्या है?

टीचर शब्द का इस्तेमाल ऐसे व्यक्ति के लिए किया जाता है जो राजयोग अभ्यास के विभिन्न सत्रों के स्पष्टीकरण से व्यक्ति को ले जाते हुए योगाभ्यास में उसका मार्गदर्शन करता है। टीचर की भूमिका एक आध्यात्मिक प्रशिक्षक की होती है।

कोष प्रबन्धन

ब्रह्माकुमारीज़ को धन कोष कहाँ से प्राप्त होता है?

ब्रह्माकुमारीज़ द्वारा दिये जाने वाले कोर्सेज़ और अन्य गतिविधियों से लाभान्वित होने वाले लोग अपनी स्वेच्छा से सहयोग देते हैं फिर वो चाहे धन के रूप में हो या सेवा के रूप में हो। ब्रह्माकुमारीज़ के विद्यार्थी औरों की सेवा करने के लिए प्रेरित होते हैं जो कि जब भी उन्हें समय मिले नियमित रूप से सेवाओं में यथाशक्ति सहयोगी बनते रहते हैं। यहाँ पर किसी भी प्रकार का सदस्यता शुल्क नहीं लिया जाता है।

कई धर्मार्थ संस्थायें राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय एजेन्सियों के द्वारा पर्यावरणीय और मानवीय सेवा में पहल हेतु धनराशि दी जाती है, जैसे कि सोलार एनर्जी प्रोजेक्ट, शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में। 

ब्रह्माकुमारीज़ के द्वारा सभी कोर्सेज़ और कार्यक्रम बिना मूल्य क्यों दिये जाते हैं? 

आध्यात्मिक ज्ञान हरेक मानवमात्र का मूलभूत अधिकार है, इस सिद्धान्त के आधार पर ही ब्रह्माकुमारीज़ का कार्य शुरू से चलता आ रहा है। संस्था के संस्थापक ब्रह्मा बाबा का यह लक्ष्य था कि हरेक को उसके जाति, धर्म, आयु, लिंग, पृष्ठभूमि अथवा आर्थिक स्थिति को न देखते हुए उसके अन्दर की आध्यात्मिक क्षमता का विकास करने का अवसर बिना मूल्य मिलना चाहिए। ब्रह्माकुमारीज़ की सभी टीचर्स और विद्यार्थियों के द्वारा इसी सिद्धान्त को अपनाया जाता है।

सहभागिता

क्या कोई भी कोर्सेज़ और कार्यक्रमों में शामिल हो सकता है?

सभी वयस्क जो भी गतिविधि उन्हें पसन्द है उसमें शामिल होने के लिए आमंत्रित हैं। स्थानीय सेवाकेन्द्र पर किसी भी कोर्स या गतिविधि में शामिल होने से पहले अनौपचारिक रूप से मुलाकात के द्वारा या फिर मिलकर की गई बातचीत के द्वारा हरेक को संस्था के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त करने का सुअवसर प्रदान किया जाता है। ज्यादातर कोर्सेज़ और कार्यक्रम में पूर्व पंजीकरण की आवश्यकता होती है।

क्या बच्चे भी सहभागी बन सकते हैं? 

16 वर्ष और उसके ऊपर के युवा ग्रुप क्लासेज़ और गतिविधियों में शामिल हो सकते हैं। 16 वर्ष के नीचे के आयु के बच्चों को उनके अभिभावक अथवा किसी और का साथ होना आवश्यक है।

ब्रह्माकुमारीज़ के सभी सेन्टर्स अपने-अपने देश और शहरों के नियमों और कायदों के अनुसार बाल सुरक्षा सम्बन्धी नीति को अपनाते हैं।

राजयोग मेडिटेशन सीखने से पहले क्या मुझे कोई पूर्व सावधानी बरतने की आवश्यकता है?

साधारणता हरेक राजयोग मेडिटेशन से लाभ ले सकते हैं, अगर आप अनिश्चितता अथवा किसी मानसिक बीमारी से पीड़ित हैं तो आपको यह सलाह दी जाती हैं कि मेडिटेशन सीखने से पहले अपने डॉक्टर को जरूर पूछें। यह भी बहुत जरूरी है कि डॉक्टर से पूछे बिना अपनी दवाईयों को कभी भी बन्द न करें। 

क्या ब्रह्माकुमारीज़ सेन्टर काउन्सलिंग (परामर्श) भी देते हैं? 

ब्रह्माकुमारीज़ के किसी भी सेन्टर पर काउन्सलिंग अथवा परामर्श नहीं दिया जाता है। उनके द्वारा वृहद स्तर पर विभिन्न कोर्सेज़ के माध्यम से आध्यात्मिक ज्ञान दिया जाता है। व्यक्ति को स्वतंत्रता है कि उसमें से अपनी इच्छा अनुसार किसी भी अभ्यास को चुन सकता है।

इतिहास और नेतृत्व

ब्रह्माकुमारीज़ की स्थापना कब और कैसे हुई?

सन् 1930 के दशक में सिन्ध हैदराबाद (जो इस समय पाकिस्तान का हिस्सा है) में ब्रह्मा बाबा, जो दादा लेखराज कृपलानी के नाम से प्रख्यात थे, के द्वारा ब्रह्माकुमारीज़ की स्थापना की गई। दादा लेखराज को विश्व परिवर्तन के साक्षात्कार उस दौरान हुए। सन् 1937 में उन्होंने आठ युवा बहनों का प्रबन्धन कमेटी बनाई और एक अनौपचारिक संगठन बनाया जिसे आज ब्रह्माकुमारीज़ के नाम से जाना जाता है। 

ब्रह्माकुमारीज़ के संस्थापक का इतिहास क्या है?

दादा लेखराज बहुत ही सम्मानीय और सफल जौहरी थे। सन 1936 में उम्र के उस पड़ाव पर जब हरेक व्यक्ति अपनी सेवानिवृत्ति का प्लान बनाता है तब उन्होंने वास्तव में बहुत सक्रिय और उत्साहवर्धक जीवन में प्रवेश किया। गहरे आध्यात्मिक अनुभव और साक्षात्कारों की श्रृंखला के बाद उन्होंने एक बहुत शक्तिशाली खिंचाव महसूस किया और अपना व्यवसाय बन्द करके अपना समय, ऊर्जा और धन पूरी तरह से इस संगठन की स्थापना में लगा दिया जिसको बाद में ब्रह्माकुमारीज़ ईश्वरीय विश्व विद्यालय के नाम से जाना जाने लगा। जल्दी ही उन्हें लोग ब्रह्मा बाबा कहने लगे। उसके बाद उन्होंने अपना पूरा जीवन विभिन्न संस्कृति, आर्थिक और धार्मिक पृष्ठभूमि के लोगों को एक साथ लाकर उनके जीवन में आध्यात्मिक पहलू की पुनर्स्थापना और विकास करने में बिताया। उन्होंने हमेशा अपनी भूमिका को निमित्त मात्र के रूप में रखी, ना कि गुरु के रूप में। उन्होंने परमात्मा को ज्योति स्वरूप के रूप कल्याणकारी पिता के रूप में पहचाना जो कि ब्रह्माकुमारीज़ और उनके कार्यों की प्रारम्भिक प्रेरणा रही। मई 1950 में इन प्रारम्भिक सदस्यों के साथ कराची पाकिस्तान से माउण्ट आबू भारत में स्थानान्तरण किया। जहाँ वे 1969 अपनी देहावसान तक रहे।

संगठन और प्रशासन

ब्रह्माकुमारीज़ के वर्तमान मुख्य कौन हैं?

सन् 1969 में जब संस्था के संस्थापक का देहावसान हुआ उसके बाद शुरुआती सदस्यों में से युवा बहनों ने संस्था का कारोबार आगे बढ़ाया। इस समय उस आदि के कुछ मुख्य बहनों में से जो बची हैं वो ज्यादातर 80 से 90 की उम्र तक की हैं। जिनका होना संगठन को शक्ति प्रदान करता रहता है, क्योंकि अपने जीवन का अधिक्तर उन्होंने आध्यात्मिक ज्ञान का गहन अध्ययन और उसके अभ्यास के अनुभव में बिताया है। ब्रह्माकुमारीज़ की इस समय की मुख्य प्रशासिका हैं दादी जानकी जी। दादी हृदयमोहिनी जी अतिरिक्त मुख्य प्रशासिका और दादी रतनमोहिनी जी सह मुख्य प्रशासिका के रूप में प्रशासन के कार्य में सहयोगी हैं।

इन महिलाओं को प्यार से दादियाँ (बड़ी बहनें) कहा जाता है जो परमात्मा के प्रति समर्पण के साथ निमित्त बनकर सेवा करती हैं। वरिष्ठ योगी होने के साथ उनका आपस में बहुत स्नेह और सम्मान का रिश्ता है और विश्व सेवा के प्रति सम्पूर्ण निष्ठा है।

ब्रह्माकुमारीज़ का मतलब क्या है?

ब्रह्माकुमारीज़ का अर्थ है ब्रह्मा की बेटियां। विश्व परिवर्तन के सपने को साकार करने हेतु आध्यात्मिक शिक्षक के रूप में महिलाओं की भूमिका बहुत ही उपयोगी भूमिका साबित होती है। ब्रह्माबाबा ने इस बात को अच्छी तरह से महसूस किया कि बहनों में मूलत: कुछ ऐसे मूल्य अथवा गुण होते हैं जैसे धैर्यता, सहनशीलता, त्याग, दया और प्रेम जिसके आधार से उनके द्वारा लोगों को अपना व्यक्तिगत उन्नति परस्पर सम्बन्ध और एक दूसरे की सम्भाल करने वाले समाज का निर्माण किया जा सकता है। महिलाओं द्वारा किये जाने वाले संस्था के नेतृत्व को प्रदर्शित करने के लिए बाबा ने इसका नाम ब्रह्माकुमारीज़ आध्यात्मिक विश्व विद्यालय रखा।