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Saturday, June 21, 2014

प्रजापिता ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय माउंट आबू के राजयोगी भगवान भाई






प्रजापिता ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय माउंट आबू के राजयोगी भगवान भाई ने राजकीय कन्या वमापा मंडी में छात्राआें को नैतिक शिक्षा का ज्ञान दिया। उन्होंने कहा कि कोई भी राष्ट्र धन शक्ति से नहीं बल्कि श्रेष्ठ चरित्रवान नागरिकों के बल पर महान बनता है। मूल्य शिक्षा के कारण की भारत महान था। कहा कि मन में पैदा होने वाले कल्याणकारी विचार ही मूल्य हैं। श्रेष्ठ विचार मन में चलने से कर्म और व्यवहार में कुशलता आती है। कहा कि मानव जीवन को अंधकार से प्रकाश, दुख से सुख और मरण से अमरत्व की ओर जाना ही वास्तव में शिक्षा का उद्देश्य है। भगवान भाई ने कहा कि कुसंग, सिनेमा और व्यसन से युवा भटकते हैं। ब्रह्मकुमारी दक्षा तथा दीपा बहन ने भी अपने विचार रखे। इस अवसर पर बीके गुलाब, जागृति सहित शिक्षक भी मौजूद रहे।

आदर्श शिक्षक आदर्श समाज का निर्माता है।















आदर्श शिक्षक आदर्श समाज का निर्माता है। एक
शिक्षक के रास्ते से भटकने पर सारा समाज भटक सकता है। यह बात प्रजापिता
ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय माउंट आबू राजस्थान से आए राजयोगी
ब्रह्मकुमार भगवान भाई ने कही। वीरवार को जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान
मंडी में आदर्श शिक्षा विषय पर कार्यक्रम रखा था। इस मौके पर भगवान भाई ने कहा
कि शिक्षा लेने के बाद जीवन में अनुशासन, भाईचारा, रचनात्मकता, जागृति आ जाए
तभी हम समाज के लिए उपयोगी बन सकते हैं। शिक्षा के द्वारा ही विचार शक्ति,
निर्णय शक्ति और सद्गुणाें का विकास होता है। इस मौके पर स्थानीय ब्रह्मकुमारी
केंद्र की बीके दक्षा ने कार्यक्रम की रूपरेखा बताई तथा ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय
विश्वविद्यालय का परिचय दिया। इस अवसर पर बीके दया, जागृति और बीके जगदीश

प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की ओर से









प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की ओर से उप जेल  में संस्कार परिवर्तन एवं व्यवहार शुद्धि विषय पर कार्यक्रम का आयोजन कर कैदियों को संस्कार युक्त शिक्षा दी गई। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के राजयोगी ब्रह्माकुमार भगवान भाई ने कहा कि एक-दूसरे से बदला लेने से समस्या अधिक बढ़ती है। इसलिए बदला लेने के बजाय स्वयं को बदलना चाहिए।
कैदियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि यह स्थान कारागार नहीं बल्कि खुद को सुधारने के लिए सुधारगृह है। इस एकांत स्थान पर बैठकर स्वयं में परिवर्तन लाने की सोचो। चिंतन करने से स्वयं बदलाव आएगा। बताया कि कारागार जीवन में परिवर्तन लाने की तपोस्थली है। इस एकांत स्थान पर बैठकर आत्मचिंतन, स्वचिंतन और परमात्मा का चिंतन करें। इससे मनोबल बढ़ेगा और भविष्य में गलती नहीं होगी। बीती हुई घटनाओं और समस्याओं का चिंतन करने से मनुष्य दुखी और अशांत बनता है। इन घटनाओं को भूलकर उससे सीख लेना ही समझदारी है।
संचालिका बीके दक्षा ने बताया कि वास्तव में मनुष्य जन्मजात अपराधी नहीं होता बल्कि गलत संगत और लोभ लालच में मनुष्य यह सब करता है। जेल अधीक्षक एनआर भारद्वाज ने कहा कि समाज को परिवर्तित करने का कार्य सराहनीय है।