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Monday, October 17, 2011

भौतिक शिक्षा के साथ नैतिक शिक्षा से ही बच्चों का सर्वांगीण विकास हो सकता है। इंदौर। भौतिक शिक्षा के साथ नैतिक शिक्षा से ही बच्चों का सर्वांगीण

भौतिक शिक्षा के साथ नैतिक शिक्षा से ही बच्चों का सर्वांगीण विकास हो सकता है। इंदौर। भौतिक शिक्षा के साथ नैतिक शिक्षा से ही बच्चों का सर्वांगीण

इंदौर। भौतिक शिक्षा के साथ नैतिक शिक्षा से ही बच्चों का सर्वांगीण विकास हो सकता है।
इंदौर। भौतिक शिक्षा के साथ नैतिक शिक्षा से ही बच्चों का सर्वांगीण विकास हो सकता है। इसके बगैर मनुष्य का काम नहीं चल सकता। ये विचार प्रजापिता ब्रह्माकुमारी विवि माउंट आबू के भगवान भाई ने व्यक्त किए। वे उमियाधाम पाटीदार कन्या छात्रावास में विद्यार्थियों को नैतिक शिक्षा का महत्व बता रहे थे। उन्होंने कहा कि नैतिक मूल्यों की कमी से ही समस्याएं बढ़ रही है। ज्ञान की व्याख्या में उन्होंने कहा कि जो शिक्षा विद्यार्थियों को अंधकार से प्रकाश की ओर, असत्य से सत्य की ओर, बंधनों से मुक्ति की ओर ले जाए वही सच्ची शिक्षा है। समाज अमूर्त है, वह प्रेम, सद्भावना, भाईचारा, नैतिकता, मानवीय मूल्यों से ही संचालित होता है। प्रगतिशील एवं श्रेष्ठ समाज इन्हीं मूल्यों से परिभाषित होता है। उन्होंने शिक्षा को ऐसा बीज बताया, जिससे जीवन फलदार वृक्ष बन जाता है। ओमशांति भवन के राजयोगी प्रकाश भाई ने कहा कि कुसंग व फैशन से युवा भटक रहा है, इससे बच्चों की दूरी आवश्यक है। प्राचार्य बबीता हार्डिया ने बताया कि मूल शिक्षा से ही व्यक्ति महान बनता है, सद्गुणों से ही व्यक्तित्व निखरता

नैतिक शिक्षा से बनेगा सौहार्दपूर्ण समाज


कटनी। आज हम विकसित देशों की श्रेणी में खड़े होने का भरपूर प्रयास कर रहे है। इसके साथ सफलता भी मिल रही है। परंतु समाज में फैल रही दुर्भावना और हिंसा चिंता का सबब बनती जा रही है। इसके लिए जरूरी है कि व्यक्तिगत स्तर पर सकारात्मक आंतरिक चेतना के विकास को महत्व दिया जाए। उक्त उद्गार प्रजापति ब्रम्हाकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के पूरे भारत में 5 हजार स्कूल में नैतिक शिक्षा का अलख जगाकर इंडिया बुक आॅफ रिकार्ड में अपना नाम दर्ज कराने वाले राजयोगी डायमंड इंग्लिश उच्च माध्यमिक विद्यालय माधव नगर के विद्यार्थियों को जीवन में नैतिक शिक्षा का महत्व विषय पर संबोधित करते हुए राजयोगी भगवानभाई ने कहा कि आज समाज, देश व विश्व की क्या स्थिति है इसके बारे में हम अच्छी तरह जानते है कि केवल भौतिक विकास से ही हमारा सर्वांगीण विकास नहीं हो सकता। नैतिक विकास से समाज और परिवार में मूल्य विकसित होते है। इससे ही पारिवारिक सामाजिक और वैश्विक स्तर पर संपूर्ण रूप से विकसित हो सकेंगे। उन्होंने आगे बताया कि आज जितना हम विकास पर ध्यान रखेंगे अपने आंतरिक शक्तियों को जागृत करेंगे उतना युवाओं सशक्तिकरण आएगा। युवाओं को अपने शक्तियां रचनात्मक कार्य में लगाये। उन्होंने कहा कि यदि अपराधमुक्त समाज चाहित तो मानवीय, नैतिक शिक्षा द्वारा संस्कारित युवाओं की निर्मित करे। इसके लिए युवाओं को आगे आना चाहिए। उन्होंने युवाओं को आंतरिक रूप से सशक्त होकर लोगों की सेवा करने के लिए आगे जाने का आव्हान किया।

नैतिक शिक्षा से बनेगा सौहार्दपूर्ण समाज

Monday, October 17th 2011
कटनी। आज हम विकसित देशों की श्रेणी में खड़े होने का भरपूर प्रयास कर रहे है। इसके साथ सफलता भी मिल रही है। परंतु समाज में फैल रही दुर्भावना और हिंसा चिंता का सबब बनती जा रही है। इसके लिए जरूरी है कि व्यक्तिगत स्तर पर सकारात्मक आंतरिक चेतना के विकास को महत्व दिया जाए। उक्त उद्गार प्रजापति ब्रम्हाकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के पूरे भारत में 5 हजार स्कूल में नैतिक शिक्षा का अलख जगाकर इंडिया बुक आॅफ रिकार्ड में अपना नाम दर्ज कराने वाले राजयोगी डायमंड इंग्लिश उच्च माध्यमिक विद्यालय माधव नगर के विद्यार्थियों को जीवन में नैतिक शिक्षा का महत्व विषय पर संबोधित करते हुए राजयोगी भगवानभाई ने कहा कि आज समाज, देश व विश्व की क्या स्थिति है इसके बारे में हम अच्छी तरह जानते है कि केवल भौतिक विकास से ही हमारा सर्वांगीण विकास नहीं हो सकता। नैतिक विकास से समाज और परिवार में मूल्य विकसित होते है। इससे ही पारिवारिक सामाजिक और वैश्विक स्तर पर संपूर्ण रूप से विकसित हो सकेंगे। उन्होंने आगे बताया कि आज जितना हम विकास पर ध्यान रखेंगे अपने आंतरिक शक्तियों को जागृत करेंगे उतना युवाओं सशक्तिकरण आएगा। युवाओं को अपने शक्तियां रचनात्मक कार्य में लगाये। उन्होंने कहा कि यदि अपराधमुक्त समाज चाहित तो मानवीय, नैतिक शिक्षा द्वारा संस्कारित युवाओं की निर्मित करे। इसके लिए युवाओं को आगे आना चाहिए। उन्होंने युवाओं को आंतरिक रूप से सशक्त होकर लोगों की सेवा करने के लिए आगे जाने का आव्हान किया।

नैतिक मूल्य

नैतिक मूल्य कम होते जा रहे हैं। ऐसे में बालिकाओं को नैतिक मूल्यों की शिक्षा देकर परिवार व्यवस्था को पुष्ट बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि बालिका शिक्षा देने वाली नारी में शुद्धता के गुण के साथ ही सहनशीलता व लगनशीलता भी होनी चाहिए। उसको हाथों के साथ - साथ हृदय और दिमाग से काम करना आना चाहिए। वह बालिका शिक्षा कार्यशाला के शुभारंभ अवसर पर बोल रहे थे।
 सरस्वती विद्या मंदिर में विद्या भारती अखिल भारतीय संस्थान द्वारा आयोजित सकारात्मक सोच और दृष्टिकोण विकसित करें। इसके लिए कार्यकर्ता के अंदर सात गुण संयमशीलता, लक्ष्य का ज्ञान, विचारों के सम्प्रेषण की क्षमता, संगठन की मानसिकता, राष्ट्र के लिए समर्पण की भावना, सेवा और सहयोग की भावना होना बेहद जरूरी हैं।  उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति का आधार धर्म रहा है और धर्म का तात्पर्य है समाज को धारण करना। इसलिए महिलाओं को पाश्चात्य संस्कृति से दूरी बनाते हुए धर्म आधारित कार्य करने चाहिए।