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Saturday, January 19, 2013

बदला मत लो, बदलकर दिखाओ





बदला मत लो, बदलकर दिखाओ

बदला मत लो, बदलकर दिखाओ
भास्कर संवाददातात्नअंबाह
'यह कारागृह नहीं बल्कि सुधारगृह है, यहां आपको सुधरने के लिए भेजा है। आपको चाहिए कि यहां से निकलकर आप बैर भाव के चलते बदला लेने जैसा अपराध न करें, बल्कि बदलकर सामाजिक हो जाएं' यह बात प्रजापिता ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय माउंट आबू से पधारे राजयोगी ब्रह्मकुमार भगवान भाई ने उप जेल अंबाह में कैदियों को संबोधित करते हुए कही।

ज्ञात हो कि शुक्रवार को स्थानीय जेल में संस्कार परिवर्तन व व्यवहार शुद्धि विषय पर कैदियों के लिए एक दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। भगवान भाई ने कहा कि सभी कैदी भाई खुद को बदलने के लिए यह सोचे कि आखिर वे इस संसार में अपराध करने या अपराधी बनने आए थे? क्या मेरे जीवन का उद्देश्य अपराधी बनना था? अगर इन बातों का जवाब आपको 'न' के रूप में प्राप्त हो तो समझ लीजिए कि आपको बदलना है। कार्यक्रम में कैदियों के अलावा स्थानीय प्रजापिता ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के सदस्य, जेल कर्मी व शहर के समाजसेवी भी उपस्थित रहे।

नैतिक शिक्षा से ही सर्वांगीण विकास






नैतिक शिक्षा से ही सर्वांगीण विकास

Matrix News | Jan 11, 2013, 06:30AM IST

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मुरैना-!-ब\"ाों के सर्वांगीण विकास के लिए भौतिक शिक्षा के साथ नैतिक शिक्षा भी जरूरी है। नैतिक शिक्षा से सर्वांगीण विकास संभव है। यह बात गुरुवार को ब्रह्माकुमारी ईश्वरी विश्वविद्यालय माउंट आबू से आए भगवान भाई ने मुडिय़ा खेड़ा में आयोजित कार्यक्रम में कही। भगवान भाई ने कहा कि छात्र जीवन में नैतिक मूल्य धारण करें यह आज के समय की आवश्यकता है। नैतिक मूल्यों की कमी से व्यक्तिगत, सामाजिक, पारिवारिक, राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय समस्याएं पैदा हो रही हैं। छात्रों के मूल्यांकन में आचरण, अनुशरण, लेखन, व्यवहारिक ज्ञान एवं अन्य बातों का भी ध्यान दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षा छात्रों को अंधकार से प्रकाश की ओर असत्य से सत्य की ओर ले जाने वाली होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अपराधमुक्त समाज के लिए जरूरी है कि युवाओं में मानवीय, नैतिक शिक्षा का समावेश किया जाए। जब युवा संस्कारित होंगे तो अपराध कम होंगे और समाज अपराध मुक्त होगा। कार्यक्रम में उपस्थित प्रधानाचार्य कप्तान यादव ने कहा कि मूल्य आधारित शिक्षा से ही व्यक्ति महान बन सकता है और सद्गुणों से व्यक्तित्व बनता है। कार्यक््रम में ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की पूनम बहन, राजेन्द्र कुमार शर्मा, कमलेश राठौड़, निर्मल, कृष्णा शर्मा आदि मौजूद थे।

नैतिक शिक्षा की भी आवश्यकता’





नैतिक शिक्षा की भी आवश्यकता’
   सर्वांगीण विकास के लिए नैतिक शिक्षा की भी आवश्यकता है। नैतिक शिक्षा से ही सर्वांगीण विकास संभव है। यह विचार प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय माउंट आबू मुख्यालय से आए राजयोगी भगवान भाई ने राउप्रावि में नैतिक शिक्षा विषय पर व्यक्त किए। भगवान भाई ने कहा कि शैक्षणिक जगत में विद्यार्थियों के लिए नैतिक मूल्यों को जीवन में धारण करने की प्रेरणा देना आज की आवश्यकता है। प्रधानाध्यापक नानूराम खटीक ने कहा कि मूल्य शिक्षा से व्यक्तित्व महान बन सकता है। कार्यक्रम के दौरान जमुना शंकर शर्मा, अजय सिंह राव, जितेंद्र व्यास, शशि संचेती, उर्मिला पारीक व मोहम्मद इस्लाम आदि उपस्थित थे।

नैतिक शिक्षा से होता है चरित्र विकास--- भगवान भाई






नैतिक शिक्षा से होता है चरित्र विकास
 छात्राओं के लिए नैतिक शिक्षा विषय पर कार्यक्रम ङ"ख१२ऋ

-ीचगनैही्रनैतिक शिक्षा से होता है चरित्र विकास ङ"ख४०ऋ

्‌ीटा्रश्योपुर। बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए भौतिक शिक्षा के साथ-साथ नैतिक शिक्षा की भी आवश्यकता है। नैतिक शिक्षा से ही चरित्र में विकास संभव है। उक्त विचार प्रजापिता ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय माउंट आबू से पधारे हुए राजयोगी ब्रह्मकुमार भगवान भाई ने व्यक्त किए।

छात्राओं की नैतिक शिक्षा विषय पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान गांधी सेवा आश्रम बालिका एवं शासकीय बालिका उमावि छात्रावास की छात्राओं को संबोधित करते हुए भगवान भाई ने कहा कि विद्यार्थियों का मूल्यांकन आचरण, अनुकरण, लेखन, व्यवहारिक ज्ञान के लिए उन्हें प्रेरणा देने की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि जो ज्ञान विद्यार्थियों को अज्ञान रूपी अंधकार से ज्योति या प्रकाश की ओर या असत्य से सत्य की ओर से जाता है।वहीं सच्चा ज्ञान है।शिक्षा लेने के बाद कोई भी शिक्षा लेने के बाद अज्ञान रूपी अंधकार में न रह जाएं।उन्होने बताया कि सद्‌गुणी शिक्षा तो मानव जीवन की शोभा है।सद्‌गुणों के आचरण से ही मानव जीवन के व्यवहार और आचरण में निखार आता है।उन्होने बताया कि शिक्षा का मूल उद्देश्य चरित्र निर्माण करने के लिए है।सद्‌गुणों से ही व्यक्ति अच्छा या बुरा बनता है,जिनमें सदगुण है,वही महान है और जिनमें सद्‌गुण नही वह कंगाल है। भगवान भाई ने कहा कि जीवन के दुर्गुण ही अंधकार है। दुर्गुण निकालकर सद्‌गुणों को अपनाना ही अंधकार से प्रकाश की ओर जाना है।अक्षर ज्ञान के साथ जीवन जीने की कला सीखना भी जरूरी है।